लखनऊ: मैदान पर प्रतिद्वंद्वी और बाहर बड़े भाई जैसा रिश्ता, क्रिकेट की यही खूबसूरती इकाना स्टेडियम में देखने को मिली। प्रिंस यादव ने LSG vs RCB मैच में विराट कोहली को जिस तरह आउट किया, उसने खुद कोहली को भी कुछ पलों के लिए सन्न कर दिया। प्रिंस ने पहली गेंद बाहर की तरफ निकाली और अगली ही गेंद इतनी तेजी से अंदर लाए कि कोहली के पास कोई जवाब नहीं था। विकेट गिरने के बाद कोहली क्रीज पर हैरानी में खड़े रहे। मैच के बाद प्रिंस ने खुलासा किया कि पिछले मैच के बाद विराट ने ही उन्हें सलाह दी थी कि जब पिच से मदद मिल रही हो, तो अपनी लेंथ के साथ प्रयोग न करें और उसी चैनल पर गेंदबाजी करते रहें। प्रिंस ने बस वही किया और उन्हें इनाम में खुद किंग का विकेट मिल गया।
विराट कोहली पर भारी पड़ा अपना ही गुरुमंत्र
क्रिकेट में अक्सर देखा जाता है कि अनुभवी खिलाड़ी युवाओं को गुर सिखाते हैं, लेकिन प्रिंस ने उन सीखों का इस्तेमाल इतनी जल्दी उन्हीं के खिलाफ कर दिया, यह काबिल-ए-तारीफ है। प्रिंस ने ब्रॉडकास्टर्स से बात करते हुए कहा, ‘विराट भैया ने कहा था कि जब तक गेंद लेंथ से मूव हो रही है, अपनी लेंथ मत छोड़ना। मैंने बस वही किया।’ यह जीत लखनऊ के लिए 213 रनों के विशाल लक्ष्य को डिफेंड करने में मील का पत्थर साबित हुई। कोहली का विकेट गिरते ही आरसीबी दबाव में आ गई और लखनऊ ने मैच पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली।
डूबती लखनऊ की इकलौती उम्मीद प्रिंस यादव
लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए यह सीजन किसी बुरे सपने जैसा रहा है, लेकिन प्रिंस यादव इस अंधेरे में रोशनी की किरण बनकर उभरे हैं। उन्होंने इस सीजन में अब तक 10 मैचों में 16 विकेट चटकाए हैं, जो एक युवा गेंदबाज के लिए शानदार आंकड़े हैं। प्रिंस की रफ्तार और गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की काबिलियत ने दिग्गजों को प्रभावित किया है। खुद प्रिंस ने स्वीकार किया कि व्यक्तिगत रूप से उनके लिए यह सीजन अच्छा जा रहा है, लेकिन एक टीम के तौर पर लगातार 6 मैच हारना काफी दर्दनाक था। कोहली का विकेट उनके करियर का अब तक का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
प्लेऑफ की रेस में सांसें अब भी बाकी
आरसीबी के खिलाफ इस जीत ने ऋषभ पंत की कप्तानी वाली लखनऊ सुपर जायंट्स की प्लेऑफ की उम्मीदों को जीवित रखा है। लगातार 6 मैचों की हार का सिलसिला तोड़कर लखनऊ ने अपनी तीसरी जीत दर्ज की है। हालांकि, उनकी राह अब भी कांटों भरी है। लखनऊ को न केवल अपने बचे हुए सभी मैच जीतने होंगे, बल्कि दूसरी टीमों के नतीजों पर भी निर्भर रहना होगा। इस जीत ने टीम के मनोबल को जरूर बढ़ाया है, और पंत की सेना अब बाकी बचे मैचों में करो या मरो के जज्बे के साथ उतरने को तैयार है।

































