भोपाल, भोपाल में आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की कथित काली कमाई का मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि लोकायुक्त पुलिस द्वारा समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं करने के कारण आरोपी को डिफॉल्ट जमानत मिल गई।
ईडी की वार्षिक लीगल रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई के बावजूद समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं किए जाने के कारण सौरभ शर्मा को 1 अप्रैल को डिफॉल्ट जमानत मिल गई।
हालांकि, ईडी की सख्त जांच के चलते वह जेल से बाहर नहीं आ सका। बाद में हाईकोर्ट ने भी ईडी की कार्रवाई के खिलाफ दायर उसकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, सौरभ शर्मा ने भोपाल स्थित ईडी कार्यालय द्वारा वर्ष 2024 में दर्ज ईसीआईआर के संबंध में बीएनएसएस की धारा 483 तथा पीएमएलए 2002 की धारा 3 और 4 के तहत नियमित जमानत के लिए आवेदन किया था। वह 10 फरवरी 2025 से हिरासत में है।
ईडी की रिपोर्ट में 108 करोड़ की अपराधिक आय है सौरभ की
अपनी वार्षिक लीगल रिपोर्ट में ईडी ने कहा है कि जमानत के लिए आवेदन करने वाले सौरभ शर्मा ने शैल कंपनियों, असुरक्षित ऋणों और वित्तीय लेनदेन का उपयोग करके लगभग ₹ 108 करोड़ की अपराधिक आय अर्जित की है। साथ ही इनकम के सोर्स छिपाकर पैसे इधर-उधर किए हैं।
इस मामले में जमानत आवेदन पर मुद्दा यह था कि क्या सौरभ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के अंतर्गत दर्ज अपराध के मामले में नियमित जमानत पाने का हकदार है? इस पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 27 सितंबर 2025 को सौरभ शर्मा बनाम प्रवर्तन निदेशालय पर फैसला देते हुए सौरभ शर्मा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सौरभ शर्मा पीएमएलए की धारा 45 की दोहरी शर्तों को पूरा करने में विफल रहा है।
दंडनीय अपराध पर नियमित जमानत मांगी थी सौरभ ने
रिपोर्ट में कहा गया है कि सौरभ शर्मा ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज ECIR 2024 के संबंध में नियमित जमानत के लिए आवेदन किया था। यह मामला PMLA, 2002 की धारा 3 और 4 में दंडनीय अपराधों से संबंधित है।
ईडी ने अपनी लीगल वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि सौरभ शर्मा के विरुद्ध ECIR विशेष प्रवर्तन प्राधिकरण (SPE) लोकायुक्त द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित) की धारा 13(2) और 13(1)(B) में दर्ज FIR के बाद रजिस्टर की गई थी, जिसमें अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया गया था।
पिछले साल मिल गई थी जमानत
ईडी की रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच एजेंसी लोकायुक्त पुलिस द्वारा तय समय सीमा के भीतर आरोप-पत्र दाखिल न कर पाने के कारण सौरभ शर्मा को 1 अप्रेल 2025 को मूल अपराध में डिफाल्ट जमानत दी गई थी। यहां अदालत ने पाया कि ईडी द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए साक्ष्य और सह-आरोपियों के बयानों से पता चलता है कि सौरभ शर्मा ने फर्जी संस्थाओं और बिचौलियों का एक नेटवर्क बनाया था।
धन का बड़े पैमाने पर हेरफेर किया
इनके साथ मिलकर उसने ऋणों, फर्जी कंपनियों और पारिवारिक खातों के माध्यम से धन का बड़े पैमाने पर हेरफेर किया था। सौरभ ने व्यक्तिगत रूप से संचालन का प्रबंधन किया था, जिससे आपराधिक इरादे और सक्रिय संलिप्तता साबित होती है और अपराध की आय और धन-वसूली के बीच स्पष्ट संबंध स्थापित होता है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यहां की गई कोई भी टिप्पणी केवल जमानत आवेदन पर निर्णय लेने के उद्देश्य से है और याचिकाकर्ता यानी आरोपी सौरभ के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई के दौरान मामले की खूबियों पर कोई राय नहीं मानी जाएगी। इस आधार पर अदालत ने माना कि ईडी ने पीएमएलए की धारा 45 की दोनों शर्तों का अनिवार्य रूप से पालन किया है और अदालत ने जमानत आवेदन खारिज कर दिया।
यह था पूरा मामला
लोकायुक्त पुलिस ने 17 दिसम्बर 2024 को आरटीओ के पूर्व आरक्षक शर्मा के अरेरा कालोनी स्थित ठिकानों पर छापेमारी कर करोड़ों रुपए नकद और अचल संपत्तियों के दस्तावेज जब्त किए थे। इसके बाद 18 और 19 दिसंबर की दरम्यानी रात राजधानी के मेंडोरी इलाके में एक इनोवा कार में 51.8 किलो गोल्ड और 11 करोड़ रुपए कैश मिला था।
इसे जब्त करने की कार्रवाई आयकर विभाग ने की थी और गोल्ड व कैश को जब्त कर लिया था। इसके बाद ईडी ने लोकायुक्त पुलिस की एफआईआर के आधार पर केस रजिस्टर किया और सौरभ शर्मा तथा उसके साथियों चेतन सिंह गौर, शरद जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया था। ईडी ने सौरभ शर्मा की 108 करोड़ की नकद और अचल संपत्ति जब्त कर उसे अपराधिक आय से अर्जित आमदनी बताया है।




































