भोपाल, कलियासोत नदी के प्रतिबंधित 33 मीटर दायरे में 40 बिल्डरों द्वारा कॉलोनियां विकसित करने का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में सामने आया है। इनमें से सिर्फ 7 निजी भूस्वामियों को हाईकोर्ट से स्थगन मिला है, जबकि बाकी मामलों में कानूनी कार्रवाई जारी है। ट्रिब्यूनल ने पूरे प्रकरण पर प्रशासन से 4 सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
सुनवाई के दौरान इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) की सैटेलाइट इमेज पेश की गईं, जिनमें संबंधित क्षेत्र वेटलैंड के रूप में चिन्हित दिख रहा है। यदि इसे आधिकारिक रूप से वेटलैंड घोषित किया जाता है, तो इस क्षेत्र में निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित हो सकता है।
डूब क्षेत्र में केमिकल फार्मिंग पर भी सवाल
सुनवाई में यह मुद्दा भी उठा कि जलाशय के डूब क्षेत्र में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग किया जा रहा है। इससे जल स्रोत प्रभावित होने की आशंका जताई गई। ट्रिब्यूनल ने जल संसाधन को मामले में जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
खाली भूमि पर फिर कब्जे
नगर निगम ने प्रतिबंधित क्षेत्र में आने वाले 4 निजी भूस्वामियों के निर्माण पहले ही ध्वस्त किए थे। हालांकि, सुनवाई में बताया गया कि कार्रवाई के बाद जमीन पर दोबारा कब्जा हो जाता है। अब पुलिस के साथ कार्रवाई होगी।
29 जुलाई को सुनवाई
ट्रिब्यूनल ने प्रशासन से कहा है कि 4 सप्ताह में एफटीएल, ग्रीन बेल्ट और डूब क्षेत्र का स्पष्ट सीमांकन, अतिक्रमणकारियों की सूची और कार्रवाई की स्थिति रिपोर्ट पेश की जाए। अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी।

































