जयपुर: राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर 2020 में अशोक गहलोत कार्यकाल के दौरान सचिन पायलट की बगावत के प्रकरण (मानसेर कांड) पर राजनीति तेज हो गई है। दरअसल, विवाद की शुरुआत सोमवार 27 अप्रैल को टोंक में हुई। यहां राधा मोहन अग्रवाल ने टोंक के कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए सचिन पायलट को बहरूपिया कहते हुए बयान दिया था कि उनकी एक टांग कांग्रेस में और एक कही और रहती है।
बयान पर गहलोत ने किया पलटवार
राधा मोहन अग्रवाल की ओर से टोंक विधायक पायलट पर बयानबाजी किए जाने के बाद इस मुद्दे पर सचिन का बचाव करते हुए गहलोत ने मानेसर का जिक्र करते हुए कहा कि पायलट की दोनों टांगे कांग्रेस में हैं। उन्हें अपनी गलती का अहसास हो गया है। अब वो संभवत कभी भी कांग्रेस को छोड़कर नहीं जाएंगे।
राधा मोहन अग्रवाल और अशोक गहलोत के बीच जुबानी जंग शुरू होने के बाद इस मामले में बीजेपी कांग्रेस के नेताओं के बीच आरोप प्रत्यारोप की राजनीति शुरू हो गई है। इस मुद्दे पर केंद्रीय कला-संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी बयान दिया है। उन्होंने कहा ‘अशोक गहलोत कांग्रेस पार्टी को मानेसर में हुई घटना को कभी भूलने नहीं देना चाहते हैं। मैंने उस घटना के समय भी कहा था। आज फिर कहता हूं कि उस घटना के रचनाकार, उस कहानी के रचयिता, उस पूरे ड्रामे के डायरेक्टर और उस ड्रामा का पटाक्षेप करने वाले सब खुद अशोक गहलोत साहब हैं।
कांग्रेस भी राधा मोहन पर बिफरी, सार्वजनिक माफी की रखी मांग
इधऱ, राधा मोहन दास अग्रवाल की ओर से सचिन पायलट को ‘बहरूपिया’ बताए जाने और उनकी निष्ठा पर सवाल किए जाने के मुद्दे पर कांग्रेस ने भी एकजुट होकर बयान का विरोध किया है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से लेकर पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास और पूर्व एमएलए दिव्या मदेरणा तक, सभी ने भाजपा प्रभारी के बयान को ‘अशोभनीय’ बताते हुए उनसे बिना शर्त सार्वजनिक माफी की मांग की है।






































