बीजापुर। जिला मुख्यालय में आयोजित जिला पंचायत की सामान्य सभा उस समय विवादों में घिर गई, जब अध्यक्ष समेत कई जनप्रतिनिधियों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। इस घटनाक्रम ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ते टकराव को उजागर कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, बैठक से कुछ दिनों पहले पंचायत सचिवों के तबादले को लेकर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) पर दबाव बनाया जा रहा था।
बताया जाता है कि इस दौरान जिला पंचायत सदस्य ने अधिकारी से दुर्व्यवहार भी किया, इसी मामले के चलते सामान्य सभा की बैठक की कार्यवाही प्रभावित हुई, महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी।
उठ रहे हैं गंभीर सवाल
क्या पंचायत सचिवों के तबादलों में हस्तक्षेप की कोशिश की जा रही थी?
क्या पारदर्शिता और नियमों के पालन से कुछ जनप्रतिनिधि असहज हैं?
या फिर यह महज राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है?
प्रशासनिक सख्ती बनी मिसाल
विशेषज्ञों का मानना है इस मामले में सीईओ का स्पष्ट और नियम आधारित रुख प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में सकारात्मक संकेत है। यदि इस तरह की सख्ती बनी रहती है, तो पंचायत स्तर पर कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सकती है।
खुले मंच से भागना क्यों?
सूत्र बताते हैं कि जिला पंचायत अध्यक्ष सहित सदस्यो ने इस मुद्दे पर सामान्य सभा में चर्चा करने के बजाय सीईओ को अपने कक्ष में बुलाने का प्रयास किया। लेकिन आईएएस अधिकारी ने साफ इनकार करते हुए कहा कि चर्चा सार्वजनिक रूप से सामान्य सभा कक्ष या उनके कार्यालय में ही होगी। यह रुख न सिर्फ पारदर्शिता बल्कि जवाबदेही का भी संकेत देता है।
सिस्टम पर उठते बड़े सवाल
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से कुछ जनप्रतिनिधियों द्वारा दबाव बनाकर निर्माण और सप्लाई कार्य अपने करीबी पेटी ठेकेदारों को दिलाने की कोशिशें भी की जा रही हैं। ऐसे में एक निष्पक्ष अधिकारी का सख्त रुख कई लोगों के लिए असहज होना स्वाभाविक माना जा रहा है।

































