सहारनपुर: यूपी के सहारनपुर से एक ऐसी पहल सामने आई है, जो समाज की पुरानी परंपराओं पर सवाल उठाते हुए मानवता की नई मिसाल पेश कर रही है। समाजसेवी जयराम गौतम ने मृत्युभोज जैसी प्रथा का खुलकर विरोध किया है और लोगों से अपील की है कि इस पर खर्च होने वाले पैसे को गरीब और जरूरतमंद परिवारों की मदद में लगाया जाए। इंटरनेट पर जयराम गौतम की अपील से जुड़े कई वीडियो सामने आए हैं जिनकी लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं।ऐसे ही एक वीडियो में चिता जलती हुई दिख रही है। इस बीच, जयराम गौतम वहां पहुंचते हैं और मरने वाले शख्स के दोनों किशोरवय बच्चों को अपने पास बुलाते हैं। वहां उपस्थित लोगों से जयराम गौतम कहते हैं- ‘इन बच्चों को नहीं पता कि मृत्युभोज क्या होता है। हमें इस परंपरा को बंद करना चाहिए। यहां जितने भाई मौजूद हैं, सब अपने साथ कफन लेकर आए और चिता पर डाल दिया। आपकी आंखों के सामने सारा कपड़ा जल जा रहा है। इससे किसका क्या फायदा हुआ? जितने पैसे का कफन आप लेकर आए, अगर उतने पैसे लिफाफे में डालकर इस परिवार को देते तो इनका भला हो जाता। उस पैसे से ये बच्चे स्कूल की किताब और जूते खरीद सकते थे। गरीब बिटिया के विवाह में मदद मिल सकती थी।’
परिवार को 500 रुपये की दी मदद
जयराम गौतम ने आगे कहा- ‘आज यहां जितने लोग यहां मौजूद हैं, सभी लोग कसम खाओ कि किसी की मौत पर कफन लेकर साथ नहीं जाओगे। ना मृत्युभोज खाएंगे और ना खिलाएंगे। मैं यहां आपके सामने इन बच्चों को 500 रुपये की मदद कर रहा हूं क्यों मैं किसी की मौत पर कफन लेकर नहीं जाता। आप कफन के पैसे इन बच्चों को दे देते तो कुछ दिन तो इनके घर का खर्च चल जाता।
‘मृत्युभोज के चलते सालों तक कर्ज में दबा रहता है परिवार’
NBT ऑनलाइन से हुई बातचीत में जयराम गौतम ने बताया कि जब किसी व्यक्ति का निधन होता है, तो उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है। ऐसे समय में मृत्युभोज का आयोजन करना खासकर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बेहद कठिन हो जाता है। वजह करीब एक से डेढ़ लाख का खर्च ऐसे में कई बार परिवार कर्ज लेकर यह भोज कराता है, जिस कारण वे सालों तक आर्थिक बोझ तले दबे रहते हैं। उनका मानना है कि यह परंपरा सामाजिक दबाव का रूप ले चुकी है, जिसे बदलने की जरूरत है।
भारतीय शिक्षा चेरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक हैं जयराम गौतम
जयराम गौतम पिछले दो दशकों से सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। वे भारतीय शिक्षा चेरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष ओर भाजपा पार्टी से जुड़े हुए सक्रिय कार्यकर्ता हैं और वर्ष 2002 से लगातार समाज सेवा कर रहे हैं। उनके कार्यों में धार्मिक स्थलों का विकास, गरीब बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था, जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी जिसमें हिंदू मुस्लिम सभी शामिल है, और महिलाओं के लिए 50 से अधिक सिलाई केंद्र खोलना शामिल है।
खाप पंचायत भी कर चुकी विरोध
मृत्युभोज को लेकर गत दिनों महा खाप पंचायतों का भी आयोजन हुआ था जिसमें मृत्यु भोज का जमकर विरोध करते हुए उसे बंद करने की घोषणा भी की थी।



































