नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका की शांति वार्ता विफल होने के बाद तेल को लेकर संकट फिर से गहरा गया है। वहीं भारत के तटों के पास ईरान से कच्चा तेल लेकर आए दो बड़े सुपरटैंकरों के लंगर डालने से ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है। यह लगभग सात साल बाद पहली बार है जब ईरानी तेल की खेप भारत पहुंची है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक यह ठीक उसी समय जब अमेरिका ईरान के निर्यात पर सख्ती बढ़ा रहा है।
वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नाकेबंदी बढ़ा दी है। इस कदम का मकसद ईरान के तेल निर्यात को रोकना है। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि वह वहां से ईरान के तेल के टैंकर नहीं निकलने देगा। ऐसे में भारत के तटों पर लंगर डाले ईरानी तेल के टैंकरों पर भी संशय के बादल छा गए हैं। बड़ा सवाल है कि क्या इन टैंकरों से तेल निकालकर भारतीय रिफाइनरियों में भेजा जाएगा या नहीं?
7 साल पहले बंद किया था आयात
अमेरिकी बैन के कारण भारत ने साल 2019 से ईरानी तेल का आयात बंद कर दिया था। हालांकि, पिछले महीने मिली एक विशेष छूट के तहत उन खेपों की खरीद की अनुमति दी गई थी जो पहले से ही समुद्र में थीं। यह कदम पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए उठाया गया था। अब ईरानी तेल पर फिर से संकट दिखाई दे रहा है। अगर यह तेल नहीं उतरा तो भारत के लिए ईरानी कच्चे तेल का इंतजार और लंबा हो सकता है।






































