नई दिल्ली: टाटा ग्रुप की एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने इस्तीफा दे दिया है। एयरलाइन लगातार घाटे में चल रही थी। साथ ही पिछले साल अहमदाबाद में हुई दुर्घटना के कारण एयरलाइन के खिलाफ रेगुलेटरी स्क्रूटिनी बढ़ गई थी। इस हादसे में 260 लोग मारे गए थे। विल्सन जुलाई 2022 में एयर इंडिया के सीईओ और एमडी बनाए गए थे और उनका कार्यकाल अगले साल जून में खत्म होने वाला था।
एएनआई ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। न्यूजीलैंड के रहने वाले विल्सन के कार्यकाल के दौरान विस्तारा का एयर इंडिया में मर्जर हुआ। साथ ही कंपनी ने अपने बेड़े का विस्तार किया और कई हाई ट्रैफिक मेट्रो रूट्स पर मार्केट लीडर इंडिगो से आगे निकलने में कामयाब रही। लेकिन ग्लोबल सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण ओवरहॉलिंग के मोर्चे पर एयर इंडिया की रफ्तार धीमी रही।
एयर इंडिया का घाटा
इन चुनौतियों के कारण एयर इंडिया को नए विमान की डिलीवरी में देरी हुई और उसे पुराने विमानों के रिफर्बिशमेंट का काम भी छोड़ना पड़ा। इससे एयरलाइन के कायाकल्प की रफ्तार धीमी हो गई। इन चुनौतियों के कारण एयरलाइन के ऑपरेशन परफॉरमेंस पर भी असर पड़ा और सर्विस क्वालिटी तथा पंक्चुएलिटी पर भारी दबाव रहा। एयर इंडिया और उसकी सहायक कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस ने वित्त वर्ष 2025 में 10,859 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया।
- एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने दिया इस्तीफा
- वह जुलाई 2022 में एयर इंडिया के सीईओ बनाए गए थे
- उनका कार्यकाल अगले साल जून में खत्म हो रहा था
- एयर इंडिया के कायाकल्प की रफ्तार बहुत धीमी थी
- टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन इससे नाराज थे
हाल में खबर आई थी कि टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन एयर इंडिया में काम की धीमी गति और जमीनी स्तर पर सुधार की कमी से थोड़े नाराज हैं। चंद्रशेखरन एयर इंडिया के भी चेयरमैन हैं। उन्होंने यूके और यूएस की दो बड़ी इंटरनेशनल एयरलाइंस के सीईओ से मुलाकात भी की थी। इनमें से किसी को एक को विल्सन का उत्तराधिकारी बनाया जा सकता है।

































