इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान की पहल बुरी तरह नाकाम हो गई है। बातचीत कराने में लगे मध्यस्थों ने बताया कि ईरान ने इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत करने से इनकार कर दिया है, जिसके बाद संघर्ष विराम कराने के क्षेत्रीय मध्यस्थता के प्रयास अब ठंडे पड़ गए हैं। तेहरान ने मध्यस्थों को साफ बता दिया है कि वह बातचीत के लिए अपने अधिकारियों को इस्लामाबाद भेजने के लिए इच्छुक नहीं है।
अमेरिका की मांगों को ईरान ने ठुकराया
ईरान ने अमेरिका की मांगों को ठुकरा दिया है जिससे बातचीत का मौजूदा ढांचा प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है। इस गतिरोध के चलते तुर्की और मिस्र बातचीत को फिर से शुरू करने के लिए नए सुझाव पेश कर रहे हैं और दोहा या इस्तांबुल जैसे नए स्थानों पर विचार कर रहे हैं।
इस्लामाबाद न जाने के पीछे ईरान का डर
इस बीच दावा किया गया है कि ईरानियों को शक है कि इस्लामाबाद को बातचीत की जगह के रूप में चुनना ट्रंप की एक चाल है, जिसका उद्देश्य ईरानी नेताओं की हत्या करना है। जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर वली नस्र ने CNN के साथ इंटरव्यू में कहा कि ईरानियों को ट्रंप पर भरोसा नहीं है।
ईरान-अमेरिका में युद्धविराम पर चल रही थी बात
इस बीच एक्सियोस की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी। इसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के बदले में संघर्ष-विराम पर सहमति बनने की उम्मीद थी। रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को ट्रंप ने एक फोन कॉल पर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ संभावित सीजफायर के बारे में बात की।

































