नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो गई है। भारत में भी इसका बड़ा असर दिखाई दिया है। भारतीय तेल बास्केट की कीमत मार्च में 113.49 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई है, जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक है। इससे पहले मार्च 2023 में यूक्रेन युद्ध के समय यह 112.87 डॉलर तक पहुंचा था, लेकिन बाद में कीमतों में नरमी आई थी। अब संडे को OPEC+ देशों की बैठक होगी। इसमें ऑयल प्रोडक्शन बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी।
1 अप्रैल को भारतीय रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल की कीमत 120.84 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई, जबकि ब्रेंट क्रूड लगभग 107 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत ें फिलहाल 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई हैं, जिससे दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है। आज शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमत में फिर से तेजी आई।
इंडियन ऑयल बास्केट महंगा क्यों?
भारत का ऑयल बास्केट ओमान, दुबई (खट्टे ग्रेड) और ब्रेंट (मीठे ग्रेड) के औसत पर आधारित होता है। इसे पिछले वित्त वर्ष में प्रोसेस किए गए कच्चे तेल के अनुपात के अनुसार तय किया जाता है।






































