भोपाल। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय के दावों के विपरीत मध्य प्रदेश के कई शहरों में गैस एजेंसियां बुकिंग के दो से तीन दिनों के भीतर सिलिंडर की डिलीवरी नहीं कर पा रही हैं।
प्रदेश के बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं। बढ़ती मांग और सर्वर संबंधी समस्याओं के कारण बुकिंग और डिलीवरी दोनों प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं। स्थिति यह है कि कई स्थानों पर पिछली डिलीवरी के 25 दिनों बाद ही नई बुकिंग स्वीकार की जा रही है, जबकि उपभोक्ताओं को सिलिंडर मिलने में चार से दस दिन तक का समय लग रहा है।
बुकिंग और डिलीवरी के बीच बढ़ा अंतर
प्रदेश के कई शहरों में गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग को पूरा करने में कठिनाई महसूस कर रही हैं। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में बुकिंग के बाद चार से पांच दिन में सिलिंडर मिल रहा है, जबकि छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में यह अवधि और अधिक बढ़ गई है। कई एजेंसियों में पिछली डिलीवरी के लगभग 25 दिन बाद ही नई बुकिंग स्वीकार की जा रही है। इसके चलते उपभोक्ताओं में बेचैनी और असंतोष बढ़ रहा है।
अवैध भंडारण पर कार्रवाई
गैस सिलिंडरों की बढ़ती मांग के बीच कालाबाजारी और जमाखोरी के मामले भी सामने आने लगे हैं। इंदौर के न्यू लोहा मंडी क्षेत्र में प्रशासन की टीम ने हरिओम गुप्ता के अवैध गैस गोदाम पर छापा मारकर 66 सिलिंडर जब्त किए। इनमें 24 व्यावसायिक और 42 घरेलू सिलिंडर शामिल हैं। इसके साथ ही गैस रिफिलिंग में उपयोग की जा रही तीन इलेक्ट्रिक मोटर और दो तौल कांटे भी बरामद किए गए। प्रशासन का कहना है कि अवैध भंडारण और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सर्वर और तकनीकी समस्याओं से भी बढ़ी परेशानी
गैस एजेंसियों को तकनीकी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। कई शहरों में मोबाइल एप के माध्यम से गैस बुकिंग नहीं हो पा रही है। मिस्ड कॉल से बुकिंग की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। कंपनियों का कहना है कि अचानक बुकिंग में भारी वृद्धि होने से सर्वर पर दबाव बढ़ गया है। ग्वालियर में पिछले तीन दिनों से फोन और आफलाइन दोनों तरीकों से बुकिंग प्रभावित रही। जिन उपभोक्ताओं ने आठ मार्च को सिलिंडर बुक किया था, उन्हें अब तक डिलीवरी नहीं मिल सकी है।
छोटे शहरों में ज्यादा खराब स्थिति
- छोटे शहरों और कस्बों में स्थिति और अधिक गंभीर है। विंध्य और महाकोशल क्षेत्र में गैस की किल्लत का असर ज्यादा दिखाई दे रहा है। रीवा के बिछिया क्षेत्र में गैस वितरण के दौरान भीड़ ने वाहन को घेर लिया। एजेंसी कर्मचारियों ने सिलिंडर लूटने का आरोप लगाया, हालांकि पुलिस ने इस आरोप से इनकार किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिनती में केवल एक सिलिंडर कम पाया गया।
- सीधी जिले में तो होम डिलीवरी की व्यवस्था पूरी तरह बंद हो गई है। कटनी और अनूपपुर में भी किल्लत की अफवाह के चलते गैस एजेंसियों के बाहर भारी भीड़ देखी जा रही है। अनूपपुर में संकट के कारण उज्ज्वला योजना के कई उपभोक्ताओं को सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है।
शादी-विवाह और होटल व्यवसाय पर असर
गैस आपूर्ति में बाधा का असर अब सामाजिक कार्यक्रमों और होटल व्यवसाय पर भी पड़ने लगा है। 14 मार्च तक कई विवाह मुहूर्त होने के कारण मांग बढ़ गई है। कई परिवारों को शादी समारोह के भोजन के मेन्यू को छोटा करना पड़ रहा है। कई होटल और रेस्टोरेंट गैस के विकल्प के रूप में कोयला, लकड़ी, भट्टी और इंडक्शन का उपयोग करने लगे हैं। कुछ स्थानों पर सीमित मात्रा में ही भोजन तैयार किया जा रहा है।
राजधानी में खुले मैदान से सिलिंडर वितरण
भोपाल में ऑनलाइन बुकिंग सुविधा बाधित होने के कारण कई एजेंसी संचालकों ने खुले मैदानों में सिलिंडर वितरण शुरू कर दिया है। सिलिंडर लेने के लिए उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं। आम दिनों में जहां एक एजेंसी प्रतिदिन 200 से 300 सिलिंडर वितरित करती थी, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 1500 से 2000 तक पहुंच गई है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को बुकिंग के लगभग दस दिन बाद सिलिंडर मिल पा रहा है।
कंपनियों का दावा: घबराहट से बढ़ी मांग
गैस वितरकों का कहना है कि सामान्य दिनों की तुलना में इन दिनों बुकिंग दोगुनी हो गई है। एचपी कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर प्रद्युम्न भदौरिया के अनुसार आम दिनों में लगभग 500 से 600 बुकिंग आती थीं, जबकि इन दिनों रोजाना 1100 से 1200 बुकिंग दर्ज हो रही हैं। इसी कारण एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है।
खाद्य आयुक्त ने किया पर्याप्त आपूर्ति का दावा
- प्रदेश के खाद्य आयुक्त कर्मवीर शर्मा ने कहा है कि राज्य में घरेलू एलपीजी, पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और पीएनजी की पर्याप्त उपलब्धता है। सरकार लगातार आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए जिलों के प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं। साथ ही ऐसे क्षेत्रों में वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने और एलपीजी की अधिक खपत वाली गतिविधियों को नियंत्रित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
































