जयपुर: राजस्थान में एलपीजी गैस की सप्लाई में कटौती के साथ ही कालाबाजारी की शिकायतें सामने आने लगी हैं। घरेलू इस्तेमाल वाले 14.5 किलो के सिलेंडर के लिए उपभोक्ताओं से 600 से 1000 रुपए तक अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं। वहीं 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर करीब 3 हजार रुपए तक में बेचा जा रहा है।
स्थिति यह है कि होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के पास अधिकतम दो दिन का ही एलपीजी स्टॉक बचा है, जिससे उनके सामने कामकाज चलाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
छोटे होटल तलाश रहे विकल्प, बड़े संस्थान मुश्किल में
गैस की कमी से निपटने के लिए छोटे होटल और रेस्टोरेंट किसी तरह वैकल्पिक इंतजाम करने में जुटे हुए हैं। हालांकि बड़े होटल और रेस्टोरेंट के सामने ज्यादा परेशानी है क्योंकि वे पूरी तरह तेल कंपनियों की सप्लाई पर निर्भर हैं। स्थिति बिगड़ने के कारण होटलों में अप्रैल माह की कई बुकिंग भी रद्द की जा रही हैं। इसका असर अन्य संबंधित उद्योगों पर भी दिखाई देने लगा है। मंगलवार को होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर समस्या रखी, लेकिन सप्लाई को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। अब कई होटल नए ऑर्डर और बुकिंग लेने में भी सतर्कता बरत रहे हैं और खाने की उपलब्धता की गारंटी देने से बच रहे हैं।
राजस्थान में हर महीने 206 हजार मीट्रिक टन एलपीजी की खपत
प्रदेश में एलपीजी की खपत काफी बड़ी है। राजस्थान देश में एलपीजी का छठा सबसे बड़ा उपभोक्ता माना जाता है। यहां 1,385 गैस वितरकों के नेटवर्क के माध्यम से जनवरी महीने में करीब 206 हजार मीट्रिक टन एलपीजी की बिक्री दर्ज की गई।
हालांकि मांग में वृद्धि सीमित रही है। पिछले साल की जनवरी के मुकाबले इस साल जनवरी में प्रदेश में एलपीजी की मांग करीब एक फीसदी बढ़ी, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह बढ़ोतरी लगभग सात फीसदी रही।
घरेलू गैस का व्यावसायिक उपयोग बढ़ने का खतरा
प्रदेश में कुल एलपीजी खपत में घरेलू उपयोग का हिस्सा करीब 86 फीसदी है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर की हिस्सेदारी लगभग 8 फीसदी रहती है। लेकिन कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने से आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग व्यावसायिक कामों में बढ़ सकता है, जिससे कालाबाजारी और तेज हो सकती है।
होटल संचालकों ने जताई चिंता
फेडरेशन ऑफ राजस्थान होटल एसोसिएशन के महासचिव राहुल अग्रवाल का कहना है कि एलपीजी डीलर्स ने फोन उठाना तक बंद कर दिया है। होटल संचालकों ने भट्टियां निकालकर वैकल्पिक व्यवस्था की कोशिश की, लेकिन कोयले की भी कालाबाजारी शुरू हो गई है। वहीं कानजी स्वीट के संचालक नवीन हरितवाल के मुताबिक जयपुर में किसी भी होटल या रेस्टोरेंट के पास दो दिन से ज्यादा का एलपीजी स्टॉक नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि लड्डू और कचौरी जैसे कई व्यंजन बनाने के लिए एलपीजी की ही जरूरत होती है, जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा है।

































