मप्र सरकार ने वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को मजबूत करने की दिशा में बड़ी पहल की है। मप्र ने असम सरकार को प्रस्ताव दिया है कि वह जंगली भैंसे और एक-सींग वाले गेंडे उपलब्ध कराए, जिसके बदले मप्र बाघ, तेंदुए या अन्य वन्यजीव देने को तैयार है।
इस संबंध में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को पत्र लिखा है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ने नवंबर 2024 में कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसे बसाने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके तहत असम, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से कुल 50 जंगली भैंसों के ट्रांसलोकेशन की अनुमति मिली है।
मप्र वन विभाग की योजना असम से 20, जबकि छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से 15-15 जंगली भैंसे लाने की है, ताकि भविष्य में गेंडे की आबादी बढ़ने पर बेहतर जीन पूल तैयार किया जा सके। गेंडों के एक जोड़े को वन विहार नेशनल पार्क में रखा जाएगा।
देशभर में एक सींग वाले 3323 गेंडे, असम में 3 हजार
भारत में वर्तमान में एक सींग वाले गेंडों की कुल आबादी 3,323 है। इनमें से 3 हजार गेंडे सिर्फ आसाम में हैं। गेंडों की 80 फीसदी आबादी सिर्फ काजीरंगा नेशनल पार्क में हैं। वहीं, भारत में जंगली भैंसों की कुल आबादी लगभग 4 हजार है।
यह असम, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में पाए जाते हैं। मप्र में भी यह पहले पाए जाते थे, लेकिन समय के साथ विलुप्त हो गए। 2023 में इस संबंध में पत्राचार हुआ था, लेकिन तब दोनों राज्यों के बीच सहमति नहीं बनी थी, न ही एटीसीए की मंजूरी मिल पाई थी।

































